Saturday, 25 August 2012

महाराष्ट्र का गृहमंत्री आरआर पाटिल ही मुंबई हिंसा का प्रमुख मास्टरमाइंड है | अगर उसका नार्को टेस्ट हो तो कई और खुलासे हो सकते है | देखिये क्या तश्वीरे भी झूठ बोलती है ? जिस शक्स के उपर पहले से ही कई गम्भीर केस चल रहे हो आखिर उसके साथ खड़े होकर एक राज्य का गृहमंत्री कई फोटो क्यों खिचवाई ? आखिर आर आर पाटिल मुंबई हिंसा के प्रमुख आरोपी मौलाना मोइन मियां के दफ्तर और उसके मस्जिद और मदरसे मे बार बार क्यों जाते है ? इतना ही नही आज़ाद मैदान हिंसा के सिर्फ पांच दिन पहले आर आर पाटिल खुद रजा एकेडमी के संचालक मौलाना मोइन मिंया के दफ्तर उससे मिलने गए |


मुंबई बीजेपी प्रवक्ता गृहमंत्री आर आर पाटिल और आज़ाद मैदान हिंसा के मुख्य आरोपी रजा एकेडमी के संचालक मौलाना मोईन मिया के सम्बन्धों को उजागर करते हुए |








मित्रों , सोचिये बड़े बड़े लोग गृहमंत्री से मिलने के लिए कई कई दिन वेटिंग मे रहते है लोगो को एप्वाइंटमेंट नही मिलता और आर आर पाटिल खुद आजाद मैदान हिंसा के प्रमुख आरोपी रजा एकेडमी के संचालक  से मिलने उसे दफ्तर गए |

एक  चौकाने वाला गम्भीर खुलासा हुआ है कि मौलाना मोईन मियां के छोटे भाई को पार्षद का टिकट आर आर पाटिल की सिपारिश से मिला था  | मौलाना का छोटा भाई व राकांपा नेता ठाणे के मुंब्रा क्षेत्र से सभासद भी है।

मित्रों, नए पुलिस कमिश्नर सतपाल सिंह ने जब आज़ाद मैदान हिंसा की नए सिरे से जाँच की तो एक गम्भीर खुलासा हुआ | गरीब नगर निवासी एक मुस्लिम महिला ने नौ अगस्त को गृहमंत्री एवं पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर सूचना दी थी कि अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति सलीम लाइट वाला अपने साथी अलाउद्दीन अंसारी के साथ मुंबई में हिंसक घटना को अंजाम देना चाहते हैं। सलीम लोगों को नकली नोट, हथियार एवं नशीले पदार्थ बांट रहा है। इस सूचना पर ध्यान दिया गया होता तो हिंसा रोकी जा सकती थी। उक्त महिला ने 14 अगस्त को पुन: गृहमंत्री एवं पुलिस आयुक्त को पत्र लिख कर हिंसा में शामिल 12 लोगों के नाम बताए थे। 

लेकिन  पुलिस को इस बारे मे कोई करवाई नही करने के आदेश किसने दिये ये एक रहस्य है | दबी जबान मे ऑफ द रिकॉर्ड कई पुलिस अधिकारी बताते है कि आर आर पाटिल ने ही पुलिस को कोई करवाई नही करने के आदेश दिये |

 इतना ही नही आर आर पाटिल ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया था कि किसी भी मुस्लिम दंगाई को गिरफ्तार नही किया जाये | मित्रों सोचिये पचास पचास पुलिस वालो को गम्भीर चोटे आने के बाद भी क्या कोई पुलिस कमिश्नर किसी दंगाई को अपने मन से छोड़ने के आदेश देगा ? क्या उसे अपने मातहत कर्मचारियों के मनोबल की चिंता नही होगी ?

 मित्रों, जब राज ठाकरे ने मुंबई मे इस घटना के खिलाफ बड़ी रैली निकाली और अपने भाषण मे आर आर पाटिल को ही मुंबई हिंसा का मुख्य जिम्मेदार बताया तब अपनी नाक बचाने के लिए आर आर पाटिल ने पुलिस कमिश्नर का तबादला करवा दिया | लेकिन आर आर पाटिल ने ये सोचा कि कहीं ये पुलिस कमिश्नर अरूप पटनायक मेरी पोल न खोल दे इसलिए आर आर पाटिल ने उसका डीजी रैंक का प्रमोशन भी दे दिया |

1 comment:

सुनील दत्त said...

आपको याद होगा एकवार पहले भी इसी गृहमन्त्री को सोनिया गाँदी के ऐजेंट अहमद पटेल व इसलामिक आतंकवादी के साथ मिलकर मुंमबई पुलिस प्रमुख का नाम तय करते हुए कैमरे पर पकड़ा गया था