Tuesday, 31 July 2012

जस्टिस एस एम सोनी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जस्टिस आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो की सुनवाई और गुजरात के मामलो से अलग रखने की मांग की | समस्त न्याय जगत मर खलबली मच गयी | उन्होंने लिखा है की महोदय मैंने गुजरात दंगो और गुजरात के कई मामलो से जुड़े उन फैसलों का अध्ययन किया है जिसमे जस्टिस आफ़ताब आलम की खण्डपीठ ने फैसला दिया है जो पूरी तरफ एक खास समुदाय की संप्रदाय का होने की वजह से पूर्वाग्रहों से प्रेरित है | आखिर तीस्ता, और जावेद जैसे लोग हर बार आफ़ताब आलम की खण्डपीठ मे ही रिट क्यों फ़ाइल करते है ?



जस्टिस सोनी ने १० पन्नों का बड़ा विस्तार मे पत्र लिखा है जिससे आफ़ताब आलम के हर फैसले का विश्लेषण भी अलग से लगाया है जो ये सिद्ध करता है की चूँकि आफ़ताब आलम मुस्लिम है इसलिए जानबूझकर मोदी जी और गुजरात के खिलाफ फैसले दिये है |

जस्टिस सोनी ने लिखा है की उनके पत्र को सिर्फ एक पत्र नही बल्कि एक पीआईएल समझकर देखा जाये |




जस्टिस सोनी ने जस्टिस आफताब आलम के द्वारा लन्दन मे वर्ल्ड इस्मालिक फोरम मे दिये गए घोर आपत्तिजनक भाषण की सीडी भी भेजी है |

मित्रों, जब भी सुप्रीम कोर्ट गुजरात के बारे मे कोई ऐसा फैसला देता है जिसमे गुजरात सरकार या मोदी जी की हार हो तो सारे मीडिया कहते है की सुप्रीम कोर्ट मे मोदी की हार .. लेकिन कोई ये नही बताता की ये फैसला देने वाले तो जस्टिस आफताब आलम है |

मित्रों, कुछ महीने पहले जावेद अख्तर ने प्रशांत भूषण के द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे एक अर्जी दायर की . गुजरात मे हुए सभी १२ एनकाउंटर की जाँच सुप्रीम कोर्ट अपने अंडर एसआईटी बनाकर करवाए |
उन्होंने ये अर्जी जानबूझकर जस्टिस आफ़ताब आलम के खण्डपीठ मे करवाई .. और जस्टिस आफ़ताब आलम ने आदेश भी दे दिया की गुजरात मे अब हुए सभी १२ एनकाउण्टर की जाँच एसआईटी से करवाई जाये |

मित्रों, जावेद अख्तर की पत्नी शबाना आज़मी के यूपी मे सिर्फ मायावती के समय मे कुल 398 एनकाउण्टर हुए जिसकी तारीफ बसपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र मे की . हमने तो इतने एनकाउण्टर जिसमे दुदुआ, निर्भय गुज्जर आदि को मार डाला और यूपी मे शांति स्थापित की | तब किसी भी मीडिया ने हल्ला नही मचाया |

जावेद अख्तर जिस राज्य मे रहते है उस महाराष्ट्र मे कुल दो हज़ार एनकाउण्टर हुए .. राजस्थान मे कुल २१० एनकाउण्टर हुए .आंध्र आदि राज्यों मे भी सैकडो एनकाउण्टर हुए ..

लेकिन जस्टिस आफ़ताब आलम को सिर्फ गुजरात मे हुए १२ एनकाउण्टर ही क्यों नजर आये ?


चलो अगर उन्होंने कहा की गुजरात मे हुए एनकाउण्टर की जाँच करो लेकिन साथ मे पूरे भारत मे हुए एनकाउण्टर की जाँच क्यों नही होनी चाहिए ?

मित्रों, जस्टिस आफ़ताब आलम के इस फैसले के अगले दिन गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे अपील किया की उसे कोई आपत्ति नही है लेकिन साथ मे पूरे भारत मे हुए एनकाउण्टर की भी जाँच होनी चाहिए ..

आखिर गुजरात ही क्यों ?

फिर सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आफताब आलम के फैसले को ही आधार बनाकर पूरे देश मे हुए एनकाउंटर की जाँच के आदेश दिये ..

अब बेचारे शिकारी खुद ही अपने ही जाल मे फंस गए |

Sunday, 29 July 2012

भारत सरकार के ऑफिशियल दस्तावेज के अनुसार केन्द्र की कांग्रेस सरकार भारत को विश्व का सबसे बड़ा मांस और गौ मांस उत्पादक देश बनाने के लिए "पिंक रिवोल्यूशन" की शुरूआत कर चुकी है | भारतीय समाज व मीडिया को जिस प्रकार से इस मुद्दे पर शर्मनाक चुप्पी रखी है उससे लगता है देश में भारत ही मर चूका है केवल इंडिया बचा हुआ है।





 मित्रों , इसके पहले कांग्रेस के प्रमुख चाहे जैसे भी हो लेकिन चूँकि उनका जन्म भारत मे हुआ था इसलिए वो थोडा बहुत तो भारतीय सभ्यता को मान देते थे .. 



और इस देश मे अनाज के उत्पादन के लिए ग्रीन रिवोल्यूशन [हरित क्रांति ] फिर दूध के उत्पादन को बढाने के लिए श्वेत क्रांति जैसे सकारात्मक प्रयास हुए . लेकिन सोनिया गाँधी के कांग्रेस प्रमुख बनते ही भारत को विश्व का सबसे बड़ा गाय के कत्लगाह बनाने के लिए पिंक रिवोल्यूशन की शुरुआत की गयी है .

. इसके अनुसार भारत को मांस के उत्पादक और निर्यात मे मे प्रथम स्थान दिलाना है | केन्द्र की कांग्रेस सरकार इसके लिए ५% सब्सिडी के साथ मांस के निर्यात पर गारंटी योजना शुरू की है | यदि मांस किसी कारण रास्ते मे खराब हो जाये या कोई देश उसे लेने से मना कर दे तो केन्द्र सरकार उस नुकसान का मुवावजा देगी | 

इतना  ही नही अगर कोई कसाई गौ हत्या के लिए स्लाटर हाउस या कत्लखाना खोलना चाहता है तो केन्द्र सरकार उसे 50 करोड रूपये की मदद देगी |

वाह रे कांग्रेस | सदियों से जिस देश मे जानवरों को देवता बनाकर पूजा जाता रहा है | हमारे सनातन धर्म के ऋसी महर्षियों ने हर एक जानवर को हिंदू धर्म से जोड़ दिया ताकि इनका अस्तिव सदाकाल तक बना रहे | नेशनल जियोग्राफिक चैनेल ने कई बार कहा है की आज अगर इस धरती पर जो जानवर बचे है उसमे हिंदू धर्म का बड़ा योगदान है क्योकि हिंदू संस्कृति मे हर एक जानवर की पूजा की जाती है |

 आज कांग्रेस की इटैलियन अध्यक्ष जो इटली की है और जो देश गाय के मांस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और जहां बच्चो को जन्म से गाय के मांस से बने पिज्जा और बर्गर खिलाये जाते है उस कांग्रेस से हम कैसे अपेक्षा रख सकते है की वो गौ वंश के कत्लेआम पर रोक लगाये ? संसार का सबसे बडा मांस उत्पादक देश बना कर भारत को कलंकित किया हुक्मरानों ने भारत को कांग्रेस ने संसार की छटवां सबसे बडा गौ मांस उत्पादक देश बना दिया .. खुशी मनाओ कांग्रेसियो मैडम की मेहनत पर | आजादी के नाम पर देश की सरकारों ने 65 सालों में सदियों से गो माता की सेवा व पूजा करने वाले भगवान राम व भगवान श्रीकृष्ण के देश को संसार का सबसे गौ हत्यारा देश बना कर कलंकित किया।


 जिस देश में विदेशी आततायी ओरंजेब व फिरंगी हुक्मरानों ने जो भारत को पशु मांस उत्पादक यानी हत्यारा देश बनाने की धृष्ठता नहीं की वह कृत्य स्वतंत्र भारत की सरकारों ने मात्र 65 साल में इस देश को विश्व का सबसे बड़ा पशु-गो वंश पशु हत्यारा बना दिया। आज पूरे विश्व में भारत सबसे ज्यादा मांस उत्पादक देश बन गया है। इस जड़ चेतन में भगवान का अंश मान कर जीवो व जीने दो का अमर संदेश पूरे विश्व को देने वाला भारत, भगवान राम व भगवान श्रीकृष्ण को मानने वालों का देश भारत, दया के सागर महावीर जैन व गौतम बुद्ध तथा अन्याय के खिलाफ सर्ववंश कुर्वान करने वाले गुरू गोविन्द सिंह का देश भारत, अहिंसा का अमर घोष करने वाले गांधी को राष्ट्रपिता मानने वाला भारत को यहां के आत्मघाती हुक्मरानों ने विश्व का सबसे बड़ा मांस उत्पादक यानी कातिल देश बना कर देश की संस्कृति व लाखों शहीदों की शहादत का घोर अपमान किया है। 


हीं गौ वंश मांस का उत्पादन में भारत पाकिस्तान से दो गुना ज्यादा कर रहा है और पूरे विश्व में सबसे ज्यादा गौ वंश मांस उत्पादक यानी कातिल देश के रूप में भारत का छटवां स्थान है। इसके लिए देश के हर राजनैतिक दल गुनाहगार है। आजादी के बाद किसी भी सरकार ने ईमानदारी से भारत को कलंकित करने वाले पशु हत्यारे बनाने वाले कृत्य को रौकने का ठोस काम तक नहीं किया। देश में अपने वोट बैंक बनाने के लिए इसका विरोध या समर्थन करने का कृत्य राजनैतिक दलों ने किया। साधु संत भी कभी कभार इसका विरोध करके अपना कर्तव्य इति समझ रहे है। 

पत्रकार, बुद्धिजीवी व समाजसेवियों की अक्ल पर तो पत्थर ही पड गया। चंद लोग इन दिनों जंतर मंतर पर गो हत्या के खिलाफ आंदोलन चला रहे है। धरना दे रहे है। परन्तु पूरा भारतीय समाज व मीडिया को जिस प्रकार से इस मुद्दे पर शर्मनाक चुप्पी रखी है उससे लगता है देश में भारत ही मर चूका है केवल इंडिया बचा हुआ है। 


प्रस्तुत है आपकी आंखे खोलने के लिए ये देश को कलंकित करने वाले आंकडे 


TOP 10 CATTLE AND BEEF PRODUCING COUNTRIES[36] CATTLE PRODUCTION

 (1000 Head) Rank Country 2009 2010 %Chg 1 India 57,960 58,300 0.6% 2 Brazil 49,150 49,400 0.5% 3 China 42,572 41,000 -3.7% 4 United States 35,819 35,300 -1.4% 5 EU-27 30,400 30,150 -0.8% 6 Argentina 12,300 13,200 7.3% 7 Australia 9,213 10,158 10.3% 8 Russia 7,010 6,970 -0.6% 9 Mexico 6,775 6,797 0.3% 10 Colombia 5,675 5,675 0.0% BEEF PRODUCTION (1000 MT CWE) Rank Country 2009 2010 %Chg 1 United States 11,889 11,789 -0.8% 2 Brazil 8,935 9,300 4.1% 3 EU-27 7,970 7,920 -0.6% 4 China 5,764 5,550 -3.7% 5 Argentina 3,400 2,800 -17.6% 6 India 2,610 2,760 5.7% 7 Australia 2,100 2,075 -1.2% 8 Mexico 1,700 1,735 2.1% 9 Russia 1,285 1,260 -1.9% 10 Pakistan 1,226 1,250 2.0%

Saturday, 28 July 2012

आसाम मे हो रहे दंगो पर कोकराझार छाती कुटने कब जायेंगे शबनम हाशमी, तीस्ता जावेद, मुकुल सिन्हा, जावेद अख्तर, आमिर खान जैसे दोगले मानसिकता वाले लोग ?




मित्रों, ये गुजरात मे १२ साल के बाद भी मोदी मोदी कहकर अपनी छाती कुटते रहेंगे | ये कभी आसाम नही जायेंगे |

क्योकि आसाम मे तो हिंदू मारे जा रहे है और हिन्दुओ के लिए आवाज उठाने पर सउदी अरब और दूसरे इस्लामिक देशो से जो मोटा तगड़ा डोनेशन मिलता है वो बंद हो जायेगा |

मित्रों, ये तथाकथित दोगले मानिसकता रखने वाले कभी भी आज तक 84 के सिख विरोधी दंगो, असाम दंगो के लिए कोई बयान नही देते इन्होने आसाम दंगो के लिए असाम सरकार को बर्खास्त करने की मांग नही की |
ये इनका सेकुलरिज्म है या दोगलापन ?

असल मे इनको सिर्फ मोदी मोदी चिल्लाने के लिए ईनाम मिलता है जैसे शबनम हाशमी को बिना किसी योग्यता और अनुभव के भारत सरकार के तीन तीन बोर्ड का मेम्बर बनाया गया है |

जैसे सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी फॉर एजुकेशन, योजना आयोग की एसेसमेंट एण्ड मोनिटरिंग अथारिटी,
अल्पसंख्यक मंत्रालय की मौलाना आज़ाद फाउंडेशन आज शबनम हाशमी को  सिर्फ मोदी मोदी और गुजरात गुजरात चिल्लाने का ईनाम इन तीन बड़े बोर्ड मे सदस्य बनाकर कांग्रेस ने दिया है |

जब शबनम हाशमी कांग्रेस की गोद मे बैठकर क्रीम और मलाई चाट रही है तो जाहिर है की उनको कभी भी कांग्रेस के पाप नही दिखेंगे ...

जब  ये गैंग गुजरात दंगो की झूठी फिल्मे सउदी अरब मे हाजियो को दिखाकर और दूसरे इस्लामिक देशो मे दिखाकर मोटा डोनेशन हजम करने का एक करोडो रूपये का धंधा बना चूका है तब ये असाम दंगो पर छाती क्यों कूटे ? आसाम दंगो पर चिल्लाने से अरब के शेख और दूसरे कट्टरपंथी नाराज हो जायेंगे और इन्हें हर महीने करोडो रूपये की आवक मिलनी बंद हो जायेगी |

केन्द्र सरकार ने सोनिया गाँधी के हाथो तीस्ता जावेद को पांच बड़े पुरस्कारों से नवाजा है | जिनमे पांच करोड रूपये का राजीव गाँधी एवार्ड, तीन पद्म सम्मान, मौलाना आज़ाद एवार्ड आदि प्रमुख है |

लेकिन कभी आज तक किसी को सिख विरोधी दंगो के लिए आवाज उठाने वालो को कांग्रेस ने एक भी एवार्ड से क्यों नही नवाजा ?

मित्रों, असल मे ये जितना भी चीखते चिलाते है मोदी जी उतना ही मजबूत होते जाते है क्योकि इनके चेहरे से गंदा नकाब उतर चूका है और इनके दोगले सेकुलरिज्म की व्याख्या पूरा देश जान चूका है |

Friday, 27 July 2012

आखिर इस देश मे पत्रकारिता के दोगले मापदंड क्यों है ? जब बरखा दत्त अफगानिस्तान जाकर तालिबान के बड़े नेताओ का इंटरव्यू लेती है तब उनकी तारीफ की जाती है .. लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से तीन बार चुने गए एक राज्य मे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने पर नई दुनिया के सम्पादक को समाजवादी पार्टी बाहर का रास्ता दिखा देती है ?


क्या मोदी जी को अपनी बात भी रखने का इस देश मे हक नही है ?

भारत की कौन सी अदालत कौन सा आयोग है जिसने मोदी जी पर सवाल उठाया है ?

आज आसाम का कांग्रेस का ही मुख्यमंत्री केन्द्र की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगता है की मैंने अतिरिक्त सुरक्षा बल और सेना की मांग की तो केन्द्र ने भेजने मे १२ दिन क्यों लगाये ?

जबकि मोदी जी ने तुरंत ही सेना बुलाकर पूरे गुजरात को सेना के हवाले कर दिया था .. और केन्द्र ने केपीएस गिल को विशेष डीजीपी बनाकर उन्हें सीधे केन्द्र को रिपोर्ट करने का आदेश दिया .. फिर भी नीच मीडिया मोदी जी पर आरोप क्यों लगती है ?

लोग गुजरात दंगो की बात करते है लेकिन साबरमती ट्रेन के जलाने की बात क्यों नही करते ?

मित्रों, इस देश की मीडिया और राजनितिक पार्टियो के दोगलेपन का अब इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है जब मोदी जी का इंटरव्यू लेने पर नई दुनिया उर्दू के सम्पादक जो सपा नेता भी है उनको सपा ने पार्टी से निकाल दिया |

मित्रों, जब मुस्लिम लीग जैसी घोर साम्प्रदायिक पार्टी जिसके चुनाव घोषणा पत्र और सम्विधान मे लिखा है कि मुस्लिम लीग भारत को इस्लामिक देश बनाएगी .. उसके २ सांसद केरल से चुनकर आये है और कांग्रेस उनकी मदद लेकर केरल और केन्द्र की सरकार चला रही है .. तब मीडिया इस मुद्दे पर कोई बहस क्यों नही करती ?

इस देश मे एलडीएफ, यूडीएफ, पीसीआरएफ, जैसी कट्टर इस्लामिक राजनितिक पार्टीयों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है जिनका पहला ही उद्देश्य भारत को इस्लामिक देश बनाना है तब कोई इस पर आपत्ति नही करता ?

मित्रों, इसके पहले सेना के एक मेजर जनरल ने मोदी जी की तारीफ की थी . तो रक्षामंत्रालय ने उनको बकायदा नोटिस देकर पूछा था कि आपने मोदी जी की तारीफ क्यों की ?

मित्रों, पूरी सेना इस नोटिस से दंग रह गयी क्योकि सेना के मैनुअल मे ये कहीं नही लिखा है की किसी राज्य के मुख्यमंत्री की तारीफ करना मना है | और वो ऐसे मुख्यमंत्री का जिसने गुजरात की सीमा पर तैनात बीएसएफ के जवानो के सुविधा के लिए बहुत कुछ काम किया और कई बार सीमा का दौरा करने जवानो से उनकी समस्याओं के बारे मे जानकारी ली .. मजे की बात ये है की बीएसएफ केन्द्र सरकार के अंतर्गत आती है |

मित्रों, उस मेजर जनरल को मोदी जी की तारीफ इतनी महंगी पडेगी उन्होंने सपने मे भी सोचा नही था | रक्षामन्त्रालय ने उनकी पूरी सीआर खराब कर दी और उनके सर्विस मैनुअल के कई जगह प्रतिकूल टिप्पणियाँ डाल दी गयी .. जिससे उनका प्रोमोशन नही हो सका |

जब कोई सिक्खो के हत्यारे राजीव गाँधी की शान मे कसीदे पढता है तब उस पर आपत्ति क्यों नही दर्ज की जाती है ?
जब प्रणव मुखजी राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के सबबसे बड़े हत्यारे जिसने पूरी सरकारी मशीनरी लगाकर सिख्खो का कत्लेआम करवाया जिसने बोफोर्स घोटाले को अंजाम दिया उसकी समाधि पर जाते है तब उनसे कोई इस बात की सफाई क्यों नही मांगता है की एक हत्यारे की समाधि पर आप क्यों गए ?


किसी भी पत्रकार ने लिए उसका पत्रकारिता का धर्म निभाना फर्ज होता है, और पत्रकारिता के पेशे मे किसी का भी इंटरव्यू लेना उसके पेशे के मूल भावना से जुड़ा है . कोई भी पत्रकार किसी के इंटरव्यू लेने मे पूर्वाग्रह की मानसिकता से ग्रसित होकर अगर इंटरव्यू लेता है तो ये गलत है |

मित्रों, शाहिद सिद्दकी ने जब मोदी जी का इंटरव्यू लिया था तब मोदी जी ने एक शर्त रखी थी और
शाहिद सिद्दकी ने भी एक शर्त रखी थी |

मोदी जी ने शर्त रखी थी की आप मेरी बात मे कोई भी तोड़मरोड़ नही करेंगे मै जो जबाब दूँगा आप उसमे एक शब्द भी अपनी तरफ ने नही जोडेंगे आपको इसके लिए वाइस रिकार्डर लाना होगा और मेरे एक एक शब्द को ठीक उसी रूप मे छापना होगा |

शाहिद सिद्दकी ने शर्त रखी थी की मै आपके अपने सवालों का पहले से लिस्ट नही दूँगा जो अमूमन हर नेता मांगते है . और मै आपसे हर मुद्दे पर सवाल करूँगा और आपको उनका जबाब देना होगा |

दोनों पक्ष एक दूसरे की मांग पर सहमत हो गए और दोनों ने एक दूसरे को दिये गए वायदे को निभाया भी | शाहिद सिद्दकी ने मोदी जी के हर जबाब को उसी रूप मे छापा जबकि टीवी चैनेल मोदी जी के हर जबाब को अपनी तरफ से तोड़मरोड़कर पेश करते है | और मोदी जी ने भी शाहिद सिद्दिकी को तय समय से र्क घंटा ज्यादा समय दिया और उनके एक एक सवालों का चाहे वो तीखे ही यों न हो जबाब दिया |

मित्रों, कुछ समय पहले कोयम्बटूर बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपी अब्दुल नजीर मदनी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषी पाया है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है जिसने १३० लोगो की जान ली है और उसके पहले केरल मे उसे बीस मामलो मे सजा हो चुकी है उससे कांग्रेस के पांच सांसद जेल मे मिलने गए थे .. तब कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से क्यों नही निकाला ?

जब केरल की विधानसभा मे कांग्रेस, मुस्लिम लीग , एलडीएल, डेमोक्रेटिक मुस्लिम फ्रंट , सीपीएम, और सीपीआई जैसी राजनितिक पार्टिया अब्दुल नजीर मदनी की सजा को माफ़ करने का प्रस्ताव पास करके उसे राष्ट्रपति के पास भेजती है तब कोई इस पर सवाल क्यों नही उठता ?

मेरे हिंदू मित्रों, अब तो जागो .. किसी भी दोगले नेता के जातिवाद के जहर के बहकावे मे मत आओ | आसाम के हालत देखो, केरल , और कश्मीर के हालात देखो आज हिन्दुओ का इन राज्यों मे क्या हाल है ? इन राज्यों मे कोई जाकर मुसलमानों को धर्मनिरपेक्षता का ककहरा क्यों नही पढता ?

Thursday, 26 July 2012

पिछले ३१ साल से हर समय प्रणव बाबू के साथ रहने वाली ओमिता पाल को प्रणव बाबू सारे नियम कानून ताक पर रखकर राष्ट्रपति पद का सचिव नियुक्त कर दिये | "ओ मेरी जोहरा जबीं .तू अभी तक है हसीं .. और मै जवां .. तुझ पे कुर्बान मेरी जान मेरी जान ." या प्रणव बाबू दूसरे एन डी तिवारी है ?




क्या ओमिता पाल से ज्यादा काबिल प्रणव मुखर्जी को दूसरा कोई नही मिला ?

"कुछ तो लोग कहेंगे .. लोगो का काम है कहना ..छोडो बेकार की बातों को .कही बीत न जाये रैना "

प्रणव मुखर्जी के वित्त मंत्री रहते ओमिता पाल और उनके पूरे खानदान ने लूट मचा रखी थी |   

पिछले इकत्तीस सालों से किसी न किसी रूप में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से चिपकी रहीं उनकी वर्तमान सलाहकार ओमिता पॉल हर तरफ से उठे विरोध के बावजूद आखिरकार अपने भाई जितेश खोसला को यूटीआई म्यूचुअल फंड का चेयरमैन बनवाने में कामयाब हो ही गयी थी | जितेश के उपर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज थे ..

इंडियन एक्सप्रेस से लेकर इकनॉमिक टाइम्स जैसे धाकड़ अखबार तक खोसला की नियुक्ति की विसंगति पर पहले पेज पर लीड खबर लगाकर शोर मचा चुके हैं। कारण यह है कि जितेश खोसला को म्यूचुअल फंड उद्योग या वित्तीय जगत का कोई अनुभव नहीं है। फिर भी उन्हें यूटीआई म्यूचुअल फंड के शीर्ष पद पर महज इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि वे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को अपनी मुठ्ठी में कसकर रखनेवाली ओमिता पॉल के भाई हैं। यहां तक कि अप्रैल में यूटीआई के नेतृत्व के लिए संभावित अभ्यर्थियों को शॉर्ट लिस्ट करनेवाली तीन सदस्यीय समिति ने जिन लोगों को छांटा था, उनमें खोसला का नाम ही नहीं था। लेकिन ओमिता पॉल ने जबरदस्ती बाद में उनका नाम डलवा दिया।


ओमिता पॉल आईआईएस (इंडियन इनफॉरमेशन सर्विस) अधिकारी हैं। वे पिछले इकत्तीस सालों से प्रणब मुखर्जी के निजी स्टाफ में शामिल रही हैं। 1980 के बाद प्रणब दा सरकार में जहां भी रहे हैं, श्रीमती पॉल उनके साथ रहीं। चाहे वो वित्त मंत्रालय हो या विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय वाणिज्य मंत्रालय अथवा योजना आयोग। यह साथ 1996 से 2004 तक तब छूटा, जब प्रणब मुखर्जी सरकार से बाहर पैदल थे। इन आठ सालों में श्रीमती पॉल ने चार विभाग बदल डाले। यहां तक 2002 में उन्होंने सरकारी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआएस) ले ली। 2004 में यूपीए की सरकार बनी तो वे वापस दादा के साथ जुड़ गईं।

दादा भी उनका पूरा ख्याल रखते हैं। मई 2009 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले दादा को चिंता लगी कि अगर वे मंत्री नहीं रहे तो श्रीमती पॉल का क्या होगा। इसलिए उन्होंने श्रीमती पॉल को केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) की कुर्सी पर पांच सालों के लिए सुरक्षित नियुक्त करवा दिया। इसका भी विरोध हुआ था। लेकिन यूपीए जीतकर फिर से सत्ता में आ गया तो श्रीमती पॉल सीआईसी से मुक्त होकर फिर से दादा के साथ आ गईं। उन्होंने 26 जून 2009 को सीआईसी के पद से इस्तीफा दिया। इसके एक दिन पहले 25 जून 2009 को ही उन्हें वित्त मंत्री की सलाहकार बनाया जा चुका था।

अंत में एक फुलझड़ी और। इस साल के बजट में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सदस्यों को कुछ भत्तों व सुविधाओं पर टैक्स की छूट दी गई है जो अभी तक मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्तों और सुप्रीम कोर्ट के जजों को हासिल थी। ये छूट तीन साल पहले 1 अप्रैल 2008 से लागू होगी। ओमिता पॉल के पति केके पॉल कभी पुलिस कमिश्नर हुआ करते थे। साल 2007 से यूपीएससी के सदस्य हैं। दो साल बाद 65 के हो जाने पर रिटायर होंगे। बाकी क्यों हुआ, कैसे हुआ, लिखने-बताने की जरूरत नहीं है।

इतना सारा कुछ कहने के बाद मेरा यही कहना है कि प्रणब मुखर्जी व्यक्तिगत जीवन में जो भी करें, यह उनका निजी मामला है, उनकी स्वतंत्रता है। लेकिन वे जब तक भारत सरकार में किसी ओहदे पर हैं, उन्हें निजी मसलों को सरकारी कामकाज में मिलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस समय वे देश के खजाने का जिम्मा संभाल रहे हैं तो उनकी जिम्मेदारी और जबावदेही बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। पिछले तीस-इकत्तीस सालों में जो भी हुआ, सो हो गया। आगे तो उन्हें थोड़ी-सी शर्म करनी चाहिए। नहीं तो यह देश उन्हें माफ नहीं करेगा।

वित्त मंत्रालय मे चर्चा चल रही थी कि अब तो प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति बन गए अब ओमिता का क्या होगा ? दो हंसो का जोड़ा बिछड़ गयो राम जुल्म भयो राम ... सब सोच रहे थे कि प्रणव मुखर्जी तो नियम कानून तोडकर ओमिता को राष्ट्रपति भवन नही ले जायेंगे .. लेकिन कल शाम को केंद्रीय केबिनेट ने ओमिता पाल की राष्ट्रपति का प्रधान सचिव नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया |

चलो अच्छा है

"इन हवाओ मे, इन फिजाओ मे आजा आजा रे तुझको मेरा प्यार पुकारे "

[डिस्क्लेमर :- पोस्ट के बीच बीच मे गाना और पोस्ट का आपस मे अगर कोई सम्बन्ध है तो ये मात्र संयोग माना जाये ]






Wednesday, 25 July 2012

गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का केन्द्र की कांग्रेस सरकार से सीधा सवाल .. क्या केन्द्र गुजरात को सौतेला राज्य समझती है ? मित्रों, ये नीच कांग्रेस गुजरात सरकार को बदनाम करने के लिए पूरे देश से २४ रूपये प्रति लीटर महंगा सीएनजी गुजरात को देती है |



सोचिए सीएनजी पूरे भारत मे सिर्फ गुजरात मे ही निकलता है और जो बाहर से आता है उसके लिए भी गुजरात सरकार ने भरूच के पास दहेज पर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी टर्मिनल बनाया है जहां कतर से गैस आती है |

लेकिन कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने गुजरात के साथ पिछले कई वर्षों से दोगलापन व्यहार कर रही थी ..केन्द्र सरकार दिल्ली को ३२ रूपये प्रति किलो के दर से सीएनजी देती है लेकिन गुजरात को वही गैस जो गुजरात की जमीन से ही निकला है उसे रूपये 49.80 प्रति किलो के भाव से देती है |

मजे की बात ये है की कांग्रेस आलाकमान के पाले हुए जमूरे और लबार जोकर गुजरात के कांग्रेस के नेता जैसे दुर्योधन झूठवाडिया, अशक्ति जाहिल, और हटेला और भागेला जैसे नमूने गुजरात मे सीएनजी के दाम को लेकर मोदी मोदी कहकर अपनी छाती कुटते रहते है |

इन नमूनों को ये नही दिखता था कि जब इनकी ही पार्टी कांग्रेस की केन्द्र सरकार गुजरात को दूसरे राज्यों से डेढ़ गुने दाम पर सीएनजी देती है तो गुजरात सरकार क्या करे ?

और जब इनसे केन्द्र सरकार के इस दोगलेपन के बारे मे पूछा जाता था तब ये नमूने या तो बात को टाल देते थे या कहते थे की गुजरात सरकार झूठ बोल रही है केन्द्र गुजरात को भी उसी दाम पर सीएनजी देता है |

मित्रों, केन्द्र की कांग्रेस सरकार के इसी दोगलेपन को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका दायर की गयी थी , जिसकी अंतिम सुनवाई कल खत्म हो गयी और फैसला भी आ गया |

चूँकि ये मामला गुजरात के ६ करोड लोगो के हितों से जुड़ा था और इसमें अन्याय करने वाला कोई और नही बल्कि भारत सरकार थी इसलिए इस अहम मुद्दे की सुनवाई खुद गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भास्कर भट्टाचार्य और जस्टिस जे बी पारदीवाला की खण्डपीठ कर रही थी |

कल की सुनवाई पर केन्द्र की कांग्रेस सरकार के तरफ से पूरी ताकत लगा दी गई थी की गुजरात सरकार को महंगे दाम पर ही सीएनजी गैस दिया जाय जिसके गुजरात सरकार को बदनाम किया जा सके | केन्द्र सरकार की तरफ से असिस्टेंट सोलिसिटर जनरल पी एस चम्पनेरी के साथ बीस बड़े वकीलों की फ़ौज लगी थी |

लेकिन हाईकोर्ट ने आदेश दिया की कोई भी केन्द्र सरकार किसी भी राज्य के साथ दोगलापन रवैया नही अपना सकती .. किसी भी वस्तु का मूल्य हर राज्य के लिए समान होना चाहिए | इसलिए अबिलम्ब केन्द्र सरकार गुजरात को भी उसी दाम पर सीएनजी दे जिस दाम पर वो दूसरे राज्यों को देती है |

यहाँ तक कि हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट मे जाने के विकल्प स्टे को भी नही दिया ..
और कहा की ये आदेश आज से इसी वक्त से लागू माना जायेगा और इस मामले मे केन्द्र को सुप्रीम कोर्ट ने जाने के लिए कोई वक्त नही दिया जायेगा .. केन्द्र इस आदेश को लागू करे और फिर अगर सुप्रीम मे जाना चाहती है तो जाये लेकिन स्टे नही मिलेगा क्योकि ये देश को बाँटने की साजिश है |

Tuesday, 24 July 2012

केन्द्र सरकार और कश्मीर सरकार हिंदू तीर्थयात्रियों के साथ सौतेला व्यहार न करे ... अमरनाथ यात्रियो की इतनी ज्यादा संख्या मे हो रही मौत पर केन्द्र और कश्मीर सरकार क्यों खामोश बैठे है ? -- सुप्रीम कोर्ट


मित्रों, कई बार मेरे पोस्ट पर कई गुबरैले आकर मुझे साप्रदायिक सौहार्द की बड़ी बड़ी बाते चेप जाते है | साम्प्रदायिक सौहार्द किसको अच्छा नही लगता ? लेकिन कई बार कुछ ऐसी घटनाये हो जाती है जिसपर खामोश रहना मै पाप समझता हूँ |

पिछले एक महीने मे कुल १२० अमरनाथ यात्रियो की मौते हुई .. केन्द्र सरकार और कश्मीर सरकार को कई चिंता नही हुई .. क्योकि मरने वाले तो हिंदू है और हिंदू इस देश मे वोट बैंक नही है |


एक तरफ हज यात्रियो के लिए पूरे देश मे कुल ५४ हज भवन है .. उनको प्रतिवर्ष कई हज़ार करोड की सब्सिडी दी जाती है जिस पर कई बार सुप्रीम कोर्ट आपात्ति उठा चूका है .. फिर इस साल तो सरकार करोडो रूपये खर्च करके उन्हें सउदी सिम कार्ड भी देने जा रही है |

अमरनाथ मे यात्रियो की लगातार हो रही मौतों पर जब केन्द्र सरकार और कश्मीर सरकार ने टका सा जबाब दे दिया कि ये तो जाने वालो की गलती है लोग जब फिजिकली फिट नही है तो यात्रा पर क्यों जाते है ? मित्रों ये जबाब किसी और का नही बल्कि खुद उमर अब्दुल्ला का था |

अगर कोई बीजेपी का मुख्यमंत्री किसी मुस्लिम यात्रा पर ऐसा टका सा जबाब दे देता तो अब तक मीडिया के सरकारी पालतू कुत्ते कई महीनों तक अपनी छाती कुटते |

फिर केन्द्र सरकार ने भी कह दिया की ये यात्रियो की लगती है |

उसके बाद एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जनहित याचिका दयार किया .. सुप्रीम कोर्ट ने जब केन्द्र सरकार से नोटिस देकर यात्रा का मार्ग और रास्ते मे उपलब्ध चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का पूरा विवरण मंगाया |

चिकित्सा विवरण देकर आज सुप्रीम कोर्ट चौक गया .. मित्रों आपातकालीन चिकित्सा के लिए केन्द्र सरकार ने कोई व्यस्था नही की है .. सेना के कुछ जवान अपनी तरफ से जो मदद देते है वही है |

फिर आज सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार किसी केन्द्र सरकार को इस मामले मे फटकार लगाई | कोर्ट ने कहा की क्या अमरनाथ यात्रा को केन्द्र सरकार एक गैरजरूरी समझती है ?

सुप्रीम कोर्ट ने उसके बाद कश्मीर सरकार और केन्द्र सरकार को चिकित्सा सुविधा, आपातकालीन व्यस्था एयर एम्बुलेंस आदि की व्यवस्था करने के आदेश दिये |

मित्रों, इसका मतलब अब हिन्दुओ को इस देश मे सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के रहमोकरम पर जीना पडेगा . अब हमे हर बात पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पडेगा तभी ये इटली की चर्च की सरकार हिन्दुओ की तकलीफों को सुनेगी |

मित्रों सत्ता के लिए कांग्रेस लोगो को किस कदर मुर्ख समझती है उसका उदाहरण आज देखने को मिला | आज सत्ता के प्यासे ये तीनों भटकती आत्माओ ने गुजरात कांग्रेस का मिनी चुनावी घोषणा पत्र पेश किया | उनके इन्होने कहा है कि अगर गुजरात मे कांग्रेस सत्ता पर आएगी तो पेट्रोल से वैट खत्म कर दिया जायेगा | रासायनिक खाद पर से वैट खत्म कर दिया जायेगा |


हा हा हा !! ऐसे फनी और मजेदार जोक सुनने के लिए कांग्रेस कार्यालय सम्पर्क करे !!

मित्रों, एक तरफ केन्द्र की कांग्रेस सरकार खाद मे गुजरात का कोटा २०% घटा देती है .. उसके वावजूद भी पूरे देश मे खाद को लेकर हाहाकार मचा है .. यूरिया खाद कई उद्योगों मे भी कई चीजे बनाने मे इस्तेमाल होती है .. ये केन्द्र की किसान विरोधी सरकार ने किसानो का कोटा ३०% घटाकर उद्योगो को यूरिया का कोटा बढा दिया |

फिर उसके बाद गुजरात सरकार को बदनाम करने के लिए गुजरात का कोटा २०% कम कर दिया .

अब क्या ये तीनों सत्ता के प्यासे इन सवालों का जबाब भी गुजरात की जनता को देंगे ?



१- जिन राज्यों मे कांग्रेस सत्ता पर है वहाँ पेट्रोलियम सस्ता क्यों नही है ?

२- गुजरात मे करीब पैतीस सालो तक कांग्रेस सत्ता पर रही है लेकिन उस समय तो गुजरात मे देश के दूसरे राज्यों से सबसे ज्यादा महंगा पेट्रोलियम बिकता था .. उस समय कांग्रेस ने सस्ता क्यों नही बेचा ?

३- अगर सच मे कांग्रेस को गुजरात के लोगो की बहुत चिंता है तो गुजरात कांग्रेस केन्द्र की कांग्रेस सरकार से कह कर केन्द्र सरकार जो पेट्रोलियम पर टैक्स वसूलती है उसे गुजरात के लिए खत्म क्यों नही करवा देती ?

४- आज गुजरात सरकार पेट्रोल पर २३% वैट और डीजल पर २१% वैट वसूलती है लेकिन केन्द्र सरकार विभिन्न प्रकार के टैक्स मिलाकर कुल ३६% टैक्स वसूलती है ..

आपको २३% टैक्स जो गुजरात सरकार वसूलती है वही क्यों दिखता है ? अगर आप सच मे ईमानदार है तो फिर आप केन्द्र से ३६% टैक्स खत्म क्यों नही करवाते ?

आखिर जनता से झूठे वायदे क्यों ? कांग्रेस अगर आज चाहे तो गुजरात मे आज ही पेट्रोल ३६% सस्ता हो सकता है उसके लिए आपको गुजरात की सत्ता की क्या जरूरत है ?
केन्द्र मे तो आपकी पार्टी की ही सरकार है | आपको तो कुछ करना ही नही है .. अब केन्द्र सरकार से कहकर एक मिनट मे गुजरात के लिए सारे केंद्रीय टैक्स को खत्म करवा देना है |

५- जैसा की हम सब जानते है कि गुजरात मे शराबबंदी है इसलिए गुजरात सरकार के पास वैट और कुछ दूसरे छोटे मोटे टैक्स को छोडकर और कोई भी रेवेन्यू का साधन नही है | फिर ऐसे मे अगर गुजरात सरकार वैट हटा दे तो तो फिर आप दूसरे विकास के कार्यों के लिए रेवेन्यू कहा से लायेंगे ?

आप बार बार जनता से सिर्फ झूठे वायदे करके उसे सब्जबाग दिखा रहे है जैसे कोई सड़क छाप आशिक किसी नाबालिक लड़की को झूठे सब्जबाग दिखाकर उसे घर से भागकर दिल्ली या मुंबई के कोठे पर बेच देता है ..

अगर आप सच मे ईमानदार है तो जनता के सामने इसका एक ब्लूप्रिन्ट क्यों नही पेश करते ?

 देश की जनता अब बहुत जागरूक हो चुकी है .. उसका उदाहरण यूपी मे आपके युवराज को अच्छी तरह से मिल चूका है . झूठे वायदों से जनता को अब मुर्ख नहीं बनाया जा सकता




Monday, 23 July 2012

इस दो साल के मासूम का बस इतना ही गुनाह है की ये हिंदू है और आसाम मे रहता है .. जिसे बंगलादेशी मुस्लिमो ने जिन्दा आग मे हवाले कर दिया .. अपने वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने आसाम को बर्बाद कर दिया है ..



पहले कश्मीर.. फिर केरल इसके बाद आसाम मे हिंदू अल्पसंख्यक हो गया है और अब मुस्लिम खुलकर हिन्दुओ के घर जला रहे है |

कोकराझार मे बीस हिन्दुओ को कांग्रेस के दामाद बंगलादेशी मुस्लीमों ने जिन्दा जलाकर मार डाला और १२०० हिन्दुओ के घर जला दिये गए |

कुल बीस हज़ार हिंदू अपना घर छोडकर राहत शिविरों मे रह रहे है |

अब कहाँ है मानवाधिकार आयोग ? अब कहाँ है गुजरात दंगो पर अपनी छाती कुटने पाले तथाकथित सेकुलर माफिया ?

आखिर सरकार अल्पसंख्यक आयोग के तर्ज पर जिन राज्यों मे हिंदू अल्पसंख्यक है वहाँ हिंदू आयोग क्यों नही बनाती ?

आये दिन केरल मे हिदुओ की हत्या हो रही है और सरकार क्यों खामोश है ?

असाम के कोकराझार मे बंगलादेशी मुस्लिम और बोडो जनजातियो के बीच भयंकर दंगा हो रहा है | पूरे आसाम मे कांग्रेस ने असम गण परिषद नामक पार्टी का बर्चस्व खत्म करने के लिए एक प्लान के तहत पूरे आसाम मे बंगलादेशी घुसपैठियों को बसाया और उन्हें भारत की नागरिकता दी |

पिछले दो दशको के बाद से आज ये बंगलादेशी मुस्लिम आज आसाम की बड़ी राजनितिक ताकत बन गए है और आसाम के कुल वोट का ३०% हिस्सा है .. चूँकि ये एकजुट होकर कांग्रेस को वोट देते है इसलिए पिछले पन्द्रह सालो से कांग्रेस आसाम मे जीतती आ रही है |

आज आसाम मन्त्रिमन्डल मे दो बांग्लादेशी मूल मे मंत्री है जिसमे से एक शाकिर अहमद ने विधायक रूमी नाथ का अपने बंगले पर बिना पहले पति को तलाक दिये धर्म परिवर्तन करवाकर निकाह करवाया था |

मित्रों, बोडो जो एक हिंदू धर्म को मानने वाली जनजाति है उनकी लड़कियों के साथ आये दिन ये बंगलादेशी मुस्लिम छेड़छाड़ करते है और उनके अपहरण भी करते है .. कोकराझार मे कुछ बंगलादेशी मुस्लिमो ने एक बोडो लड़की को स्कूल के बाहर से उठाने की कोशिश की फिर उस लड़की ने शोर मचा दिया तो लडके भाग गए लेकिन बाद मे उनलोगों ने बोडो हिन्दुओ के घरों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया |

मित्रों, ये नीच कांग्रेस सिर्फ अपने वोट की खातिर इस देश को बर्बाद कर देगी .. कांग्रेस को सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब है उसे इस देश के बहुसंख्यक हिन्दुओ की कोई परवाह नही है |

और कांग्रेस की इस साजिश मेविदेशो के कंट्रोल होने वाली  नीच मीडिया उसका पूरा सहयोग दे रही है |

हिन्दुओ ,, जागो अब तो संगठित हो जाओ .. नही तो हमारी आने वाली पीढ़ियां हमे कभी माफ़ नही करेंगी |

Sunday, 22 July 2012

कौन है वो नीच गद्दार क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद को धोखे से मरवाने वाला ........? वो दूसरा कोई नही बल्कि जवाहर लाल नेहरु है ..



मित्रों, चंद्रशेखर आज़ाद की मौत से जुडी फ़ाइल आज भी लखनऊ के सीआइडी ऑफिस १- गोखले मार्ग मे रखी है .. उस फ़ाइल को नेहरु ने सार्वजनिक करने से मना कर दिया .. इतना ही नही नेहरु ने यूपी के प्रथम मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त को उस फ़ाइल को नष्ट करने का आदेश दिया था .. लेकिन चूँकि पन्त जी खुद एक महान क्रांतिकारी रहे थे इसलिए उन्होंने नेहरु को झूठी सुचना दी की उस फ़ाइल को नष्ट कर दिया गया है ..

क्या है उस फ़ाइल मे ?
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उस फ़ाइल मे इलाहबाद के तत्कालीन पुलिस सुपरिटेंडेंट मिस्टर नॉट वावर के बयान दर्ज है जिसने अगुवाई मे ही पुलिस ने अल्फ्रेड पार्क मे बैठे आजाद को घेर लिया था और एक भीषण गोलीबारी के बाद आज़ाद शहीद हुए |

नॉट वावर ने अपने बयान मे कहा है कि " मै खाना खा रहा था तभी नेहरु का एक संदेशवाहक आया उसने कहा कि नेहरु जी ने एक संदेश दिया है कि आपका शिकार अल्फ्रेड पार्क मे है और तीन बजे तक रहेगा .. मै कुछ समझा नही फिर मैं तुरंत आनंद भवन भागा और नेहरु ने बताया कि अभी आज़ाद अपने साथियो के साथ आया था वो रूस भागने के लिए बारह सौ  रूपये मांग रहा था मैंने उसे अल्फ्रेड पार्क मे बैठने को कहा है "

फिर मै बिना देरी किये पुलिस बल लेकर अल्फ्रेड पार्क को चारो ओर घेर लिया और आजाद को आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन उसने अपना माउजर निकालकर हमारे एक इंस्पेक्टर को मार दिया फिर मैंने भी गोली चलाने का हुकम दिया .. पांच गोली से आजाद ने हमारे पांच लोगो को मारा फिर छठी गोली अपने कनपटी पर मार दी |"

आजाद नेहरु से मिलने क्यों गए थे ?
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इसके दो कारण है

१- भगत सिंह की फांसी की सजा माफ़ करवाना
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महान क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद जिनके नाम से ही अंग्रेज अफसरों की पेंट गीली हो जाती थी, उन्हें मरवाने में किसका हाथ था ?  27 फरवरी 1931 को क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद की मौत हुयी थी । इस दिन सुबह आजाद नेहरु से आनंद भवन में उनसे भगत सिंह की फांसी की सजा को उम्र केद में बदलवाने के लिए मिलने गये थे, क्यों की वायसराय लार्ड इरविन से नेहरु के अच्छे ''सम्बन्ध'' थे, पर नेहरु ने आजाद की बात नही मानी,दोनों में आपस में तीखी बहस हुयी, और नेहरु ने तुरंत आजाद को आनंद भवन से निकल जाने को कहा । आनंद भवन से निकल कर आजाद सीधे अपनी साइकिल से अल्फ्रेड पार्क गये । इसी पार्क में नाट बाबर के साथ मुठभेड़ में वो शहीद हुए थे ।अब आप अंदाजा लगा लीजिये की उनकी मुखबरी किसने की ? आजाद के लाहोर में होने की जानकारी सिर्फ नेहरु को थी । अंग्रेजो को उनके बारे में जानकारी किसने दी ? जिसे अंग्रेज शासन इतने सालो तक पकड़ नही सका,तलाश नही सका था, उसे अंग्रेजो ने 40 मिनट में तलाश कर, अल्फ्रेड पार्क में घेर लिया । वो भी पूरी पुलिस फ़ोर्स और तेयारी के साथ ?
अब आप ही सोच ले की गद्दार कोन  हें ?

२- लड़ाई को आगे जारी रखने के लिए रूस जाकर स्टालिन की मदद लेने की योजना
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मित्रों, आज़ाद पहले कानपूर गणेश शंकर विद्यार्थी जी के पास गए फिर वहाँ तय हुआ की स्टालिन की मदद ली जाये क्योकि स्टालिन ने खुद ही आजाद को रूस बुलाया था . सभी साथियो को रूस जाने के लिए बारह सौ  रूपये की जरूरत थी .जो उनके पास नही था इसलिए आजाद ने प्रस्ताव रखा कि क्यों न नेहरु से पैसे माँगा जाये .लेकिन इस प्रस्ताव का सभी ने विरोध किया और कहा कि नेहरु तो अंग्रेजो का दलाल है लेकिन  आजाद ने कहा कुछ भी हो आखिर उसके सीने मे भी तो एक भारतीय दिल है वो मना नही करेगा |

फिर आज़ाद अकेले ही कानपूर से इलाहबाद रवाना हो गए और आनंद भवन गए उनको सामने देखकर नेहरु चौक उठा |

आजाद ने उसे बताया कि हम सब स्टालिन के पास रूस जाना चाहते है क्योकि उन्होंने हमे बुलाया है और मदद करने का प्रस्ताव भेजा है .पहले तो नेहरु काफी गुस्सा हुआ फिर तुरंत ही मान गया और कहा कि तुम अल्फ्रेड पार्क बैठो मेरा आदमी तीन बजे तुम्हे वहाँ ही पैसे दे देगा |

मित्रों, फिर आपलोग सोचो कि कौन वो गद्दार है जिसने आज़ाद की मुखबिरी की थी ?








नरेन्द्र मोदी को कॉंग्रेस द्वारा खत्म करने की साजिश की सुपारी दी गई है? राजनैतिक रूपसे ~►•"Operation No Namo“ – संडे गार्डियन ने किया चौकानेवाला खुलासा- 2014 तक अब करेंगे निजी हमले ~~~~~~~~~~~ ~►•सोनिया का गुप्त राजनीती आतंकवादी ऑपरेशन दो कोंग्रेसीयों द्वारा लीक ~►•तहलका-अन्य मिडीया – एक डिफेंस ओफ़ीसर – साउथ की दो अभिनेत्रियों को भाड़े पे लेकर सीडी बनवाकर मोदी जी को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश ►►►►►उतर आयी कॉंग्रेस अपने पारिवारिक गंदे खून की राजनीति पर: मोदी को बदनाम करने की साजिशके लिए टीम ►►►►►►►►►



►►►कॉंग्रेस ने आने-वाले चुनावो मे अपनी ऐतिहासिक सफाई होनेवाली है यह भाँप कर अभी से, नरेंद्र मोदी के पीएम पद की और बढ़ते कदमो और देशभर मे उन्हे मिल रहे अभूतपूर्व समर्थन से घबरा कर, कॉंग्रेस फिरसे अपनी वही पुरानी वैश्यावृत्ति वाली नीच और हलकट राजनीती पे उतर आई है ।

 
►►►संप्टेंबर 2011 से इसी साजिश के शुरुआती दौर मे जुड़े हुए 2 कोंग्रेसीयों के हवाले से यह तथ्य सामने आया है । इस टास्क फोर्स का उद्देश्य मोदी जी को गुजरात तक ही सिमीत रखके अपने लिए 2014 के चुनावो मे से मजबूत दावेदार को रास्ते से हटाना है । और इसलिए कई गंभीर जूठे आरोपो से मोदी जी की राष्ट्रीय छबी को कलंकित करने की तैयारिया करके बैठे है । जिसके लिए कॉंग्रेस ने तहलका और अन्य मीडिया को बाकायदा कोन्ट्राक्ट दे चुकी है ।

►►►इस मीडिया-सुपारी का मुख्य उद्देश्य मोदी जी को बदनाम करके , गुजरात मे बीजेपी की सीटे घटाना (3 आंकड़ो से नीचे करीब 90 सीट) है और इस तरह से बीजेपी द्वारा देश की राजनीति मे मोदी जी के प्रवेश को प्रतिबंधित करना है । इसी ऑपरेशन-नो-नमो के तहत कॉंग्रेस उत्तराखंड और कर्णाटक वाली कार्यशैली से काम करेगी, बीजेपी के ही नेताओ से संपर्क बनाके। इसी लिए गुजरात के ही गद्दार एंटी-मोदी केशु वाली मंडली को हर तरह से मदद देने पर आमादा है, कॉंग्रेस का मानना है की केशुभाई की वजह से कमसे कम गूज़-बीजेपी को 17 सीटो का नुकशान होगा ।

►►►►►►सबसे ज्यादा शर्मनाक यह है की कॉंग्रेस की इस ऊपरी दिखावे की राजनीति से अलग गलत तरीको से वह नरेंद्र मोदी की छबी खराब करने मे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । क्यूंकी वह मोदी जी को किसी भी तरह भ्रष्टाचार के मामले मे और गोधरा के मामले मे फँसाने मे असमर्थ रही है । तो कॉंग्रेस की एक सीक्रेट टास्क-फोर्स मोदी के खिलाफ सबूत बनाने मे लगी हुई है जिसमे अत्याधुनिक टेक्नोलोजी से सीडी बनाने मे जुटी हुई है ।

►►►►►►उसके लिए कॉंग्रेस ने एक एनडीए –नेशनल दीफेंस अकेडमी पंजाब के एक अफसर और तमिलनाडु की दो अभिनेत्रीयों को पैसे दिये गए है, मोदी जी के खिलाफ एफीडेवीट दायर करने हेतु । उस पंजाबी अफसर को चंडीगढ़ मे बड़ी जमीन और दोनों अभिनेत्रियों को दो फिल्मों मे काम तक दे दिया है । जो सीडी बनेगी उसमे डिजिटाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल करेंगे ।

सोनिया गाँधी ने ऑपरेशन "नो नमो " की कमान पी चितंबरम को दी थी | ऑपरेशन ७०% पूरा हो चूका था मित्रो, इसमें तमिल की दो अभिनेत्रियों को मोहरा बनाकर मोदी जी को बदनाम करने की पूरी साजिश रची गयी थी | इसके लिए कांग्रेस नेशनल डिफेन्स एकेडमी मे काम कर चुकी एक महिला की भी मदद ले रही थी |


मोदी जी के भाषणों की सीडी ने उनके द्वारा बोले गए शब्दों को उठाकर अति आधुनिक तरीके से उसे इन अभिनेत्रियों के साथ फोन पर बातचीत की शक्ल दी जा रही थी .. कांग्रेस ने इसके लिए विदेशो से भी बड़े बड़े विशेषज्ञ बुला रखे थे |

बातचीत की ये सीडी कांग्रेस खुद सामने न लाकर इंटरनेट और सोशल मीडिया के द्वारा फैलाकर फिर उसके बाद देश के तीन बड़े न्यूज़ चैनेल एनडीटीवी, एबीपी न्यूज़, आजतक के द्वारा सामने लाने वाली थी |

कांग्रेस को भी पता था की फोरेंसिक जाँच मे ये सीडी फेक साबित हो जायेगी लेकिन कांग्रेस किसी भी तरह इसे बस चुनावी मुद्दा बनाने के लिए करने वाली थी |

असल मे कांग्रेस और केशुभाई मे एक समजौता हो गया है . कांग्रेस केशुभाई को २० सीटें देने देगी .. लेकिन खुलकर नही बल्कि इन २० सीटों पर कांग्रेस जानबूझकर बेहद कमजोर प्रत्यासी खड़ा करेगी ..

असल मे कांग्रेस की नींद खुद उसी के द्वारा करवाए गए एक गुप्त सर्वे से उड़ चुकी है |
कांग्रेस ने देश की जानी मानी एजेन्सी से सर्वे करवाया था जिसके अनुसार अगर मोदी जी गुजरात चुनावो मे भारी जीत हासिल करते है तो फिर उनकी ईमेज देश मे एक बहुत बड़े और कद्दावर नेता के तौर पर उभर कर सामने आएगी | जो राहुल गाँधी की ईमेज को पूरी तरह खत्म कर देगी


फिर वो केन्द्र की राजनीती मे सक्रिय होंगे ..जिससे राहुल गाँधी के लिए राजनीती करना और प्रधानमंत्री बनने का सपना चूरचूर हो जायेगा |

इस सर्वे के ये भी कहा गया है की अगर नरेंद्र मोदी गुजरात छोडकर पूरे देश मे घूमते है तो फिर उनकी स्वीकार्यता बहुत बढ़ेगी और बीजेपी काफी मजबूत होकर उभरेगी .. चूँकि मोदी को संगठन खड़ा करने मे महारत है इसलिए वो बीजेपी को एकजुट भी कर लेंगे |

कांग्रेस को भी पता है की वो गुजरात मे सरकार नही बना सकती | गुजरात मे ८३ सीट से ही पूर्ण बहुमत हासिल हो जाता है .. जबकि आज बीजेपी के पास १३२ सीटें है | लेकिन कांग्रेस ये चाहती है की किसी भी कीमत पर मोदी को ९० से १०० के बीच मे रोका जाये जिससे उनकी पकड़ गुजरात पर कमजोर हो और वो गुजरात न छोड़ सके |


मित्रों, इसके लिए कांग्रेस ने दोनों तामिल अभिनेत्रियों को मुंबई और चेन्नई मे बेहद महंगे फ़्लैट दिलवाए है और नेशनल डिफेन्स वाली महिला को मोहाली मे बंगला दिल्यावा गया है .. कांग्रेस इस सीडी के द्वारा से भी सामने लाना चाहती थी की ये फ़्लैट मोदी जी ने दिलवाए है .. इसके लिए कांग्रेस ने एक हवाला कारोबारी को भी अपने इस साजिस मे शामिल कर लिया था |

चितंबरम पूरी तरह इस साजिस की हर रोज मोनिटरिंग कर रहे थे .. और कांग्रेस इस साजिश मे काफी हद तक आगे जा चुकी थी ..

लेकिन इस षड्यंत्र से जुड़े एक गुप्तचर अधिकारी ने दिल्ली के एक पब मे शराब के नशे मे चकचूर होकर इसका खुलासा कर दिया |

मित्रों हुआ ये की पब मे राहुल गाँधी बनाम मोदी की बहस चल रही थी .. किसी ने कहा की गुजरात मे अगर मोदी बम्पर सीटों मे जीतते है तो फिर उनकी छबी बड़ी हो जायेगी .. इसी बात पर इस साजिश मे शामिल व्यक्ति कहा की कांग्रेस मोदी को ९० सीटों पर रोक देगी ..और उनके पूरी साजिश का खुलासा कर दिया |

ये तीनों फटे ढोल हरियाणा मे मारुति फैक्ट्री मे हुयी भीषण हिंसा पर कब बोलेंगे ?? मित्रों, गुजरात मे कोई खजेला कुत्ता मरता है तब ये सत्ता के प्यासे और सत्ता के लिए तडप रहे कांग्रेसी नेता उस कुत्ते से लिपटकर विधवा विलाप करते है .. हाय !! मेरा बेटा चला गया !! मेरा भाई चला गया !!!!


और हर एक मामले पर गन्दी राजनीती करनी शुरू कर देते है | इनका मकसद ये नही होता की किसी भी मामले का हल निकले बल्कि ये कोई भी मसले पर चावल, नमक हल्दी डालकर फिर नीचे आग जलाकर अपनी खिचड़ी पकाने लगते है |

गुजरात की जनता जब इनसे ये पूछती है कि मूर्खो तुमलोगों ने 36 साल तक लगातार एकक्षत्र राज किया है तब तुमने क्या किया ? तब ये दूम दबाकर पतली गली से दुबक लेते है |

मित्रों, कांग्रेसी राज्यों मे कानून व्यवस्था की हालात बहुत ही खराब है ये खुद इनकी ही केन्द्र सरकार की गृहमंत्रालय की रिपोर्ट कहती है ..

आज हालात ये हो गयी है कि विदेशो की सरकारे भी अपने देश की कम्पनियों को कांग्रेस शासित राज्यों मे निवेश से मना करने लगी है |

कल को हरियाणा मे मारुति सुजुकी के प्लांट मे हुआ वो शायद भारत के माथे पर एक बहुत बड़ा धब्बा है | क्योकि एक तरफ तो सरकार निवेश के लिए मेहनत कर रही है दूसरी तरफ निवेश के लायक माहौल नही बना पा रही है |

कल मारुति सुजुकी के प्लांट मे दस हज़ार लोगो की भीड़ राड, लाठी, आदि लेकर पूरे प्लांट को तहस नहस कर दिया .सारे अधिकारीयों की जमकर पिटाई की गयी . फिर प्लांट मे आग लगा दी गयी .पूरा प्लांट जलकर भस्म हो गया . १०० अधिकारियों को अस्पताल मे भर्ती कराया गया है . एक मैनेजर को जिन्दा जलाकर मार डाला गया | पांच जापानी अधिकारियो को गम्भीर हालात मे जलने पर मेदंता मे भर्ती किया गया है |

फैक्ट्री के बाहर खड़ी १००० नई कारों को तोडकर तहस नहस कर दिया गया है |

सुजुकी के चेयरमेन ने ओसाका से एलान किया कि अब कम्पनी अपने गुजरात मे लग रहे प्लांट के निर्माण को बहुत तेज पूरा करेगी और हरियाणा से अपना बोरिया बिस्तर समेटकर गुजरात चली जायेगी |

आओ मेरे दोस्त मारुति गुजरात मे तुम्हारा स्वागत है ,, ये कांग्रेसी किसी के सगे नही होते ..ये तुम्हारे साथ ऐसे ही बलात्कार करते रहेंगे


भारत के एटार्नी जनरल गुलाम मोहम्मद वहानवटी के पास सिर्फ दो योग्यता है-- १- उनका मुस्लिम होना . २- कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और अहमद पटेल का कट्टर मुसलमान होना और इनसे नजदीकी



जिसके दम पर वो सुप्रीम कोर्ट मे हर हप्ते फटकार खाने और केस हारने के वावजूद भी भारत के एटार्नी जनरल बने हुए है |

मित्रों, भारत के वर्तमान एटोर्नी जनरल गुलाम मोहम्मद वहावनवती के नाम एक रिकार्ड दर्ज हो गया है .. सबसे ज्यादा केस हारने का .और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा केन्द्र सरकार को सबसे ज्यादा लात खिलाने का |

चाहे २ जी घोटाला हो या कामनवेल्थ हो , या मुस्लिम आरक्षण हो या सीवीसी नियुक्त करने का मामला हो या राम सेतु का मामला हो या मोदी को घेरने का मामला हो,या जनरल वीके सिंह के उम्र विवाद का मामला हो, ऐसे सैकडो मामले है जिसमे न सिर्फ केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट मे हारी है बल्कि उसे सुप्रीम कोर्ट के द्वारा खूब लात भी खानी पड़ी है ..

कई बार क़ानूनी हलकों मे गुलाम मुहम्मद वहावनवती के क़ानूनी ज्ञान का खूब मजाक उड़ाया जाता है क्योकि इनके नेतृत्व मे केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट मे लगातार हर केस न सिर्फ हारती जा रही है बल्कि केन्द्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोज लताड भी खानी पड़ रही है |

खुद कांग्रेस पार्टी के तरफ से कई बार गुलाम मोहम्मद को इतने बड़े पद पर होने के औचित्य को लेकर केन्द्र सरकार को पत्र लिखा गया है की इन्हें हटाकर किसी काबिल इंसान को एटार्नी जनरल जैसे पद पर बैठना चाहिए . लेकिन अहमद पटेल और सलमान खुर्शीद दोनों बहुत ही कट्टर मुस्लिम है इसलिए गुलाम मोहम्मद वहावनवती को मुस्लिम होने की वजह से उनके नाकाबिल और नकारा होने के वावजूद भी एटार्नी जनरल के पद पर रखा गया है .. यहाँ तक की आजतक क़ानूनी जगत मे गुलाम मोहम्मद के नाम कोई भी उल्लेखनीय योगदान दर्ज नही है |


मित्रों, ताजा मामला कल का है .. कल सुप्रीम कोर्ट मे २ जी मामले पर केन्द्र की प्रेसिडेंशियल रिफरेंस की सुनवाई चल रही थी .. इन जनाब ने कहा की भारत मे कोई भी किसी भी मामले पर कोर्ट मे चला जाता है और जनहित याचिका लगा देता है जिससे भारत मे निवेश का माहौल खराब होता है ..

फिर कोर्ट ने इन्हें सोच समझकर बोलने को कहा और कहा की क्या आपकी सरकार आम नागरिको से न्याय मांगने के अधिकार या लोगो के लिए अदालतों के दरवाजे बंद करने की सोच रखती है ? क्या केन्द्र सरकार चाहती है की कोई किसी मामले पर अदालत का दरवाजा न खटखटाये ? सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी खुद गुजरात मे कई कम्पनियों के जमीन देने के मामले पर गुजरात सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे गयी है . तो क्या केन्द्र सरकार इस देश मे दो नीतियो को लागू करती है ?

फिर इसने कहा कि भारत की निवेश की ईमेज पूरे विश्व मे खराब हो रही है . और गुलाम मुहम्मद ने अपने दलील मे बराक ओबामा की उस टिप्पड़ी को शामिल किया जिसमे ओबामा ने कहा था की भारत मे निवेश के लिए माहौल बहुत खराब है .. और कहा की अब तो ओबामा भी भारत मे निवेश के लिए अच्छा माहौल चाहते है .

फिर तो जैसे सुप्रीम कोर्ट की खोपड़ी शार्ट हो गयी .. जज ने इसे इतना लताड़ा की अगर कोई इज्जतदार शक्स होता तो तुरंत इस्थीपा दे देता |

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की क्या अब भारत के कायदे कानून ओबामा के अनुसार चलेंगे ? क्या आप ओबामा के लिए केस लड़ रहे है या भारत सरकार के लिए ? ओबामा के बयान पर क्या भारत सरकार अपनी पॉलिसी बदल देगी ?

आइन्दा आप दलील देते समय ध्यान रखे की आप एटार्नी जनरल है और आप सुप्रीम कोर्ट मे दलील दे रहे है नही तो सुप्रीम कोर्ट आपके खिलाफ केन्द्र सरकार से शिकायत करेगी |

लेकिन चूँकि कांग्रेसी जन्मजात बेशर्म होते है इसलिए इनको शर्म कैसे आएगी ?

Saturday, 14 July 2012

1984 मे कांग्रेस द्वारा प्रायोजित और राजीव गाँधी की सहमती से हुए बहादुर कौम शिक्खो के सामूहिक नरसंहार का भयावह सच कुछ तश्वीरो द्वारा .... नीच, और कांग्रेस के हाथो बिकी मीडिया कभी इन तश्वीरो को नही दिखाएगी

मित्रों, शिख भारत मे मात्र २% है लेकिन सेना और दूसरे सुरक्षा बलों मे उनकी भागीदारी ११% से भी ज्यादा है | ये एक बहादुर और सच्ची कौम है जिसने भारत मे दो दो बार त्रासदी झेली | एक बार जब इन्हें अपना परिवार जमीन आदि सब कुछ छोडकर पाकिस्तान से भारत आना पड़ा .. फिर दूसरी बार १९८४ मे जब इंदिरा गाँधी की हत्या हुई तब कांग्रेस ने इन्हें दुबारा पूरी तरह से उजाड दिया |


मित्रों, इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद शुरू मे शिखो पर छोटे मोटे हमले हुए और दो या तीन शिख मारे गए . फिर जब दूरदर्शन के एक पत्रकार ने राजीव गाँधी के इस बाबत पूछा तो उन्होंने एक बेहद गैरजिम्मेदाराना बयान दिया जिसने आग मे घी का काम किया | उन्होंने बकायदा दूरदर्शन पर कहा कि "जब जंगल मे कोई बड़ा पेड गिरता है तो आसपास की जमीन हिलने लगती है और छोटे मोटे पेड उखड जाते है " | मतलब साफ था कि राजीव गाँधी खुद सिखों का नरसंहार चाहते थे | फिर राजीव गाँधी का इशारा मिलते ही कांग्रेस के दिल्ली मे तीन बड़े नेताओ और सांसद सज्जन कुमार, तात्कालीन केबिनेट मंत्री जगदीश टाइटलर, तात्कालीन केबिनेट मंत्री हरकिशन लाल भगत मे शिखो के नरसंहार करने की होड़ मच गयी | असल मे ये तीनों ज्यादा से ज्यदा शिखो का नरसंहार करके राजीव गाँधी के गुड़ बुक मे आना चाहते थे | इस तीनों के तो बकायदा अपने गुर्गो को कह दिया की एक सरदार की पगड़ी लाने पर एक हज़ार नगद .. और एक सरदार का घर जलाने पर १०००० नगद मिलेगा |


मित्रों, दिल्ली के शिख विरोधी दंगो पर सबसे दोगला रवैया भारतीय मीडिया और तथाकथित सेकुलर कुत्तों का है | जो मीडिया और सेकुलर जानवर जाकिया जाफरी, जाहिरा शेख, इशरत जहां को इंसाफ दिलाने के लिए जी जान लगा देते है वही लोग शिखो के इंसाफ के लिए क्यों नही कुछ करते ?

दिल्ली के इस भयावह दंगो के दस गवाहों को जगदीश टाइटलर के ईशारे पर मौत के घाट उतार दिया गया और सैकडो गवाहों को डरा धमका कर खामोश करवा दिया गया |


मित्रों, इन दंगो के बाद भी कांग्रेस अपने इन त्री रत्नों के साथ मजबूती से खड़ी रही और इन्हें टिकट देकर सांसद और मंत्री भी बनाया | जगदीश टाइटलर इन दंगो के बाद दस सालो तक केन्द्र मे केबिनेट मंत्री रहे और उन्हें ट्रांसपोर्ट, सड़क मंत्रलय जैसा भारी भरकम पद दिया गया था | उन्हें कई सालो तक कांग्रेस सेवा दल का प्रमुख भी बनाया गया था | कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनावो मे भी जगदीश टाइटलर को टिकट दिया था लेकिन एक पत्रकार ने जब पी चितंबरम के उपर जूता फेककर विरोध किया जब जाकर उनका टिकट काट दिया गया |
लेकिन वो जुडो फेडरेशन के आज भी चीफ बने हुए है |
सज्जन कुमार भीदंगो के बाद १० सालो तककांग्रेस के सांसद रहे |





एक शिख महिला को लाठियो से पिटते दिल्ली पुलिस

स्टेशन पर कुछ इस तरह बेईजतकरते हुए बिना कफन के लाशे भेजी जाती थी

मरने के बाद कफन भी नसीब नही हुआ क्योकि ये शिख था

कांग्रेसी दंगाईयों ने औरतो और बच्चो तक को नही छोड़ा .. देखिये एक हसते खेलते पूरे परिवार को मौतके घाट कांग्रेसियो ने उतार दिया


जो शिख दिल्ली से भागना चाहते थे उन्हें ट्रेनों और बसों से खीचकर मारा गया











विलाप करते शिख परिवार 

एक शिख अपने जले हुए घर को देखते हुए

बहशीपन की इंतिहा .. एक सरदार के गले मे टायर डालकर जिन्दाजला दिया कांग्रेसी गुंडों ने


जिन्दाजलता एक शिख .जिसे पूरी बहशी भीड़ घेरे हुए है









मित्रों, मुझे माफ़ करना क्योकि मैंने बहुत ही रोंगटे खड़े करने वाले फोटो अपलोड किये है | लेकिन गुजरात दंगो पर अपनी छाती कुटने वाली कांग्रेस और मीडिया का सच सामने लाने के लिए ये जरूरी था |







अरे कमीनों मीडिया वालो .. अब तो शर्म करो .. बाबू सिंह कुशवाहा के कांग्रेस के शामिल होने पर अपनी छाती कुटने वालो .. मीडिया के कुत्तों आज सीपी सिंह के कांग्रेस मे शामिल होने पर और फिर उतरांखंड के निवासी न होने पर भी उत्तराखंड मे राज्यमंत्री का दर्जा दिये जाने पर चूप क्यों हो ? मीडिया वालो एक वेश्या भी तोड़ी बहुत शर्म रखती है लेकिन तुमसब तो वेश्या से भी गए गुजरे हो ..



मित्रों, उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम के पूर्व एमडी सीपी सिंह ने उ.प्र. में हजारों करोड़ रुपये का गोलमाल किया। सूबे में सरकार बदलते ही निर्माण निगम के खिलाफ आधा दर्जन एफ.आई.आर. दर्ज करवा दी गयी और लखनऊ के एस.एस.पी. ने रीजनल पासपोर्ट आफीसर को उनका पासपोर्ट जब्त करने का आदेश कर दिया। सपा सरकार उनके विरूद्ध सीबीआई जांच की सोच ही रही थी कि उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उन्हें अवस्थापना आयोग के सलाहकार के पद पर तैनात करके राज्समंत्री का दर्जा दिलवा दिया। उनके मीडिया मैनेजमेंट का कमाल ही था कि कहीं किसी चैनल या अखबार में एक भी खबर नहीं छपी।

सूत्रों से पता चला है कि काग्रेस ने एनडीटीवी, एवीपी न्यूज़, आईबीएन सहित सभी मीडिया को उनके औकात के हिसाब से दो करोड से लेकर बीस लाख तक दिये है ताकि ये खबर मीडिया मे चलने न पाए ..

कौन है सीपी सिंह :-

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सीपी सिंह के पास पांच खरब रूपये की संपत्ति है .. इनका रुसूख दो दो प्रदेशो यूपी से लेकर उतराखण्ड तक मे फैला है |

बसपा सरकार में आने के बाद निर्माण निगम के प्रबन्ध निदेशक पद पर सीपी सिंह की तैनाती हुई। तैनाती होते ही सीपी सिंह ने अपने ऐसे हुनर दिखाना शुरू कर दिये कि मुख्यमंत्री मायावती उन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गयीं। निर्माण निगम में हजारों करोड़ रुपये के कामों का अंबार लग गया। निर्माण निगम के मामूली कर्मचारी भी रातों-रात करोड़पति बन गये। सीपी सिंह की हैसियत का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय मायावती के घर जाने की हिम्मत बसपा के धुरंधरों की भी नहीं थी उसी समय सीपी सिंह बेधड़क मुख्यमंत्री निवास जाया करते थे।

सीपी सिंह का रूतबा इतना बढ़ गया था कि कई विधायक और बडे़ माफिया भी सार्वजनिक रूप से इस अदने से इंजीनियर का पैर छुआ करते थे। सीपी सिंह जिसके सिर पर हाथ रख देते थे वह रातों रात करोड़पति बन जाता था। बताया जाता है कि सीपी सिंह की हैसियत बीते पांच सालों में पांच हजार करोड़ से अधिक की हो गयी थी। निजी सुरक्षा गार्डों की टीम उनके साथ चला करती थी। यूं तो वैसे भी उनके विरुद्घ बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी, मगर कोई ऐसा करने की जुर्रत करता भी तो उसे शांत करने के कई नुस्खे सीपी सिंह के पास थे। इसमें पैसे के प्रलोभन से लेकर धमकाना तक सब शामिल था। यही कारण रहा कि सीपी सिंह का शासन निर्बाध रूप से चलता रहा। इस बीच सीपी सिंह का सेवाकाल भी समाप्त हो गया मगर इन्हें लगातार सेवा विस्तार दिया जाता रहा। इस दौर में लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश के सभी बडे़ कामों का ठेका निर्माण निगम के पास रहता था और स्वाभाविक रूप से यह काम करने का जिम्मा उसी ठेकेदार का रहता था जिस पर सीपी सिंह मेहरबान होते थे।

सड़कों पर फटेहाल घूमने वाले लोग रातों-रात करोड़पति हो गये। लखनऊ के बहुचर्चित अंबेडकर पार्क का निर्माण हो या फिर कांशीराम स्मारक का। प्रदेश में अस्पताल बनने हों या जेल। माया का दुलारा यह अफसर ही तय करता था कि काम कौन और किस क्वालिटी का करेगा। जाहिर है जब लागत से सौ गुना अधिक दर पर इस्टीमेट बनेगा तो पैसा भी उसी गति से आयेगा। लखनऊ के अम्बेडकर पार्क और कांशीराम पार्क का निर्माण निगम की इसी धांधली का गवाह है कि जहां सात लाख का हाथी अड़तालीस लाख में खरीदा गया। यहां लाइटें ब्राजील से मंगवायी गयी। हकीकत यह थी कि इन लाइटों पर नाम सिर्फ ब्राजील का था बाकी सारा निर्माण भारत में ही हुआ था। मायावती के दोनों दुलारे जानते थे कि अगर सत्ता परिवर्तन हो गया तो उनकी मुसीबत हो जायेगी। लिहाजा दोनों अपना-अपना सुरक्षित ठिकाना ढूंढने में लगे थे। टी राम ने तो राजनीति की राह पकड़ी और बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंच गये। मगर सीपी सिंह को अपनी दौलत का बहुत गुरूर था। उन्हें लगता था कि पैसे के दम पर सब मैनेज किया जा सकता है।

मगर सूबे में अखिलेश सरकार के बनने के बाद निर्माण निगम के दिन खराब होने शुरू हुए। पुलिस ने निर्माण निगम में धांधली की आधी दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस को शक था कि निर्माण विभाग में धांधली की आधी दर्जन से अधिक एफआईआर की जांच में खुद के फंसने के डर से सीपी सिंह विदेश भाग सकते हैं। लखनऊ पुलिस ने रीजनल पासपोर्ट ऑफीसर को पत्र लिखकर सीपी सिंह का पासपोर्ट जब्त करने को कहा। समाजवादी पार्टी के नेता चाहते थे कि इस मामले की सीबीआई जांच करवा दी जाए जिससे सीपी सिंह के साथ-साथ बसपा को भी घेरा जा सके। सीपी सिंह जानते थे कि अगर इस मामले की सीबीआई जांच हो गई तो उन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता। लिहाजा उनके गुर्गे इस बात के लिए लग गये कि चाहे कितना भी पैसा खर्च हो जाये मगर सीपी सिंह को कांग्रेस का संरक्षण मिल जाये। सूत्रों का कहना है कि यूपी के एक बडे़ नेता को पचास करोड़ की रकम इस बाबत उपलब्ध भी करा दी गयी और शेष आधी रकम को मनचाही तैनाती या कांग्रेस में उचित स्थान पर मिलने के बाद देने का वायदा

Friday, 13 July 2012

मित्रों, आसाम मे आई भयंकर बाढ़ पर प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी बिना कोई जमीनी कार्य किये सिर्फ तीन अरब रूपये के विमान मे बैठकर हवाई सर्वेक्षण के नाम पर पिकनिक मनाकर वापस आ आये ... सुना है की सोनिया गाँधी हाथियों, गैंडो और आदमियो को उपर से हवाई जहाज मे बैठके डूबता देखने मे बड़ा मजा आता है .. ये सोचती होगी कि कितना सुंदर दृश्य है चारो ओर अथाह जलराशि और उसमे डूबते इंसान वाह ,, क्या सीन है ...


 


अब आगे देखिये मै चार फोटो पोस्ट करने जा रहा हूँ जिसमे २००६ मे सूरत मे आई बाढ़ मे मोदी जी प्लेन मे घूमने की बजाय सात दिनों तक सिर्फ बिस्किट खाकर बोट मे घूम घूमकर राहत कार्य किये ..

मोदी जी को दिन रात काम करते देख अधिकारियों और जवानो मे और जोश आ गया .. और पूरा सूरत इस भयंकर आपदा के बात तुरंत उठ खड़ा हुआ |

मित्रों, मोदी जी के इस जज्बे की पूरी दुनिया की मीडिया ने तारीफ की थी . बीबीसी और डायचे और सीएनएन ने कई बार मोदी जी को बाढ़ प्रभावित एरिया मे खुद राहत कार्य करते दिखाया .. संयुक्त राष्ट्र ने भी मोदी जी की तारीफ की थी |

लेकिन गूगल से सारे फोटो कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने हटवा दिये . मैंने ये सारे फोटो आज सीएम ऑफिस से लिए ताकि आसाम मे हवाई जहाज से घूम रहे मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी को इन फोटो को देखकर कुछ तो शर्म आये