Tuesday, 31 July 2012

जस्टिस एस एम सोनी ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जस्टिस आफ़ताब आलम को गुजरात दंगो की सुनवाई और गुजरात के मामलो से अलग रखने की मांग की | समस्त न्याय जगत मर खलबली मच गयी | उन्होंने लिखा है की महोदय मैंने गुजरात दंगो और गुजरात के कई मामलो से जुड़े उन फैसलों का अध्ययन किया है जिसमे जस्टिस आफ़ताब आलम की खण्डपीठ ने फैसला दिया है जो पूरी तरफ एक खास समुदाय की संप्रदाय का होने की वजह से पूर्वाग्रहों से प्रेरित है | आखिर तीस्ता, और जावेद जैसे लोग हर बार आफ़ताब आलम की खण्डपीठ मे ही रिट क्यों फ़ाइल करते है ?



जस्टिस सोनी ने १० पन्नों का बड़ा विस्तार मे पत्र लिखा है जिससे आफ़ताब आलम के हर फैसले का विश्लेषण भी अलग से लगाया है जो ये सिद्ध करता है की चूँकि आफ़ताब आलम मुस्लिम है इसलिए जानबूझकर मोदी जी और गुजरात के खिलाफ फैसले दिये है |

जस्टिस सोनी ने लिखा है की उनके पत्र को सिर्फ एक पत्र नही बल्कि एक पीआईएल समझकर देखा जाये |




जस्टिस सोनी ने जस्टिस आफताब आलम के द्वारा लन्दन मे वर्ल्ड इस्मालिक फोरम मे दिये गए घोर आपत्तिजनक भाषण की सीडी भी भेजी है |

मित्रों, जब भी सुप्रीम कोर्ट गुजरात के बारे मे कोई ऐसा फैसला देता है जिसमे गुजरात सरकार या मोदी जी की हार हो तो सारे मीडिया कहते है की सुप्रीम कोर्ट मे मोदी की हार .. लेकिन कोई ये नही बताता की ये फैसला देने वाले तो जस्टिस आफताब आलम है |

मित्रों, कुछ महीने पहले जावेद अख्तर ने प्रशांत भूषण के द्वारा सुप्रीम कोर्ट मे एक अर्जी दायर की . गुजरात मे हुए सभी १२ एनकाउंटर की जाँच सुप्रीम कोर्ट अपने अंडर एसआईटी बनाकर करवाए |
उन्होंने ये अर्जी जानबूझकर जस्टिस आफ़ताब आलम के खण्डपीठ मे करवाई .. और जस्टिस आफ़ताब आलम ने आदेश भी दे दिया की गुजरात मे अब हुए सभी १२ एनकाउण्टर की जाँच एसआईटी से करवाई जाये |

मित्रों, जावेद अख्तर की पत्नी शबाना आज़मी के यूपी मे सिर्फ मायावती के समय मे कुल 398 एनकाउण्टर हुए जिसकी तारीफ बसपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र मे की . हमने तो इतने एनकाउण्टर जिसमे दुदुआ, निर्भय गुज्जर आदि को मार डाला और यूपी मे शांति स्थापित की | तब किसी भी मीडिया ने हल्ला नही मचाया |

जावेद अख्तर जिस राज्य मे रहते है उस महाराष्ट्र मे कुल दो हज़ार एनकाउण्टर हुए .. राजस्थान मे कुल २१० एनकाउण्टर हुए .आंध्र आदि राज्यों मे भी सैकडो एनकाउण्टर हुए ..

लेकिन जस्टिस आफ़ताब आलम को सिर्फ गुजरात मे हुए १२ एनकाउण्टर ही क्यों नजर आये ?


चलो अगर उन्होंने कहा की गुजरात मे हुए एनकाउण्टर की जाँच करो लेकिन साथ मे पूरे भारत मे हुए एनकाउण्टर की जाँच क्यों नही होनी चाहिए ?

मित्रों, जस्टिस आफ़ताब आलम के इस फैसले के अगले दिन गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट मे अपील किया की उसे कोई आपत्ति नही है लेकिन साथ मे पूरे भारत मे हुए एनकाउण्टर की भी जाँच होनी चाहिए ..

आखिर गुजरात ही क्यों ?

फिर सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आफताब आलम के फैसले को ही आधार बनाकर पूरे देश मे हुए एनकाउंटर की जाँच के आदेश दिये ..

अब बेचारे शिकारी खुद ही अपने ही जाल मे फंस गए |

4 comments:

P.D.Gangwar said...
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P.D.Gangwar said...

ऐसे व्‍यक्‍ति के ऐसे प्रतिष्‍ठित पद पर रहने का कोई अधिकार नही है।
सभी जस्‍टिस आफताब आलम से डर गये हैं। डर की वजह से कोई भी कमेन्‍ट नही कर रहा है।

vaibhav said...

jo justice darte hai unhe bhi justice ki post par rehne ka adhikar nahi...

kush chaturvedi said...

mai to aaj tk aftab aalam ko bhut hi nek banda samjhta tha ..... bhut bdi thes lga ye jaan ke..